रविवार, 22 सितंबर 2013

प्रकृति

        प्रकृति की गोद में जो मजा है वो कंक्रीट के जंगल में कहाँ......?
      धरती पर रहने में जो मजा है वो चाँद के वीराने में कहाँ...?  
          प्रेम से रहने में जो मजा है वो बात बिगाड़ने में कहाँ.....?
       मेहनत की रोटी में जो मजा है वो मांग कर खाने में कहाँ......?
        तभी तो किसी का दिल जीतने में जो मजा है वो दिल तोड़ने में कहाँ......?

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